UPSC में हिंदी-मैथिली वालों का हाल! IAS-IPS चयन के आंकड़े चौंकाएंगे

UPSC Civil Services Examination को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों युवा IAS, IPS और दूसरी प्रतिष्ठित सेवाओं में जाने का सपना लेकर इसकी तैयारी करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे अभ्यर्थियों की भी होती है जो अंग्रेजी के बजाय हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा देना पसंद करते हैं।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े हिंदी और मैथिली माध्यम से UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाले नजर आते हैं। केंद्र सरकार की ओर से राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, हिंदी और मैथिली माध्यम से UPSC Civil Services Examination के माध्यम से IAS और IPS पदों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या 2021 से 2024 के बीच काफी उतार-चढ़ाव से गुजरी है।

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UPSC में हिंदी-मैथिली माध्यम से कितने उम्मीदवार बने IAS-IPS?

सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो हिंदी और मैथिली माध्यम से मुख्य परीक्षा लिखने वाले तथा IAS-IPS पदों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या हर साल एक जैसी नहीं रही।

2021 में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 10 थी। 2022 में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ और यह आंकड़ा बढ़कर 27 हो गया। इससे हिंदी और मैथिली माध्यम के अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद जगी होगी कि आने वाले वर्षों में संख्या और बढ़ सकती है।

हालांकि 2023 में तस्वीर फिर बदल गई। उस साल हिंदी और मैथिली माध्यम से अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या घटकर 14 रह गई। इसके बाद 2024 में यह संख्या और कम होकर केवल 5 रह गई।

इस तरह 2022 के मुकाबले 2024 में आंकड़ा काफी नीचे आ गया। यह गिरावट उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो UPSC की तैयारी हिंदी या मैथिली जैसे भारतीय भाषाई माध्यम से कर रहे हैं।

आठवीं अनुसूची की भाषाओं में UPSC का प्रदर्शन कैसा रहा?

सिर्फ हिंदी और मैथिली की बात करने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। सरकार ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में UPSC की मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों से संबंधित आंकड़े भी राज्यसभा में बताए।

2021 में इन भाषाओं में कुल 538 उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा लिखी थी। इनमें से 26 उम्मीदवार सफल हुए। 2022 में परीक्षा लिखने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 587 हुई और सफल उम्मीदवारों का आंकड़ा 71 तक पहुंच गया।

2023 में 599 उम्मीदवारों ने इन भाषाओं में परीक्षा दी, लेकिन सफल उम्मीदवारों की संख्या घटकर 57 रह गई।

2024 में एक खास बदलाव देखने को मिला। उस वर्ष आठवीं अनुसूची की भाषाओं में मुख्य परीक्षा लिखने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 1,133 हो गई। यानी पिछले साल की तुलना में उम्मीदवारों की संख्या में काफी वृद्धि हुई। इसके बावजूद सफल उम्मीदवारों की संख्या 50 रही।

इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में सफलता का आंकड़ा उसी गति से नहीं बढ़ रहा।

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हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए क्या संकेत मिलते हैं?

इन आंकड़ों को केवल भाषा की हार या जीत के रूप में देखना सही नहीं होगा। UPSC एक बहुस्तरीय परीक्षा है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू जैसे चरण शामिल होते हैं। अंतिम चयन कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है।

हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों के सामने भाषा के अलावा अध्ययन सामग्री, अपडेटेड रिसोर्स, उत्तर लेखन, करेंट अफेयर्स और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन जैसी कई चुनौतियां हो सकती हैं।

आज हिंदी में UPSC की तैयारी के लिए पहले की तुलना में काफी अधिक सामग्री उपलब्ध है। इसके बावजूद उम्मीदवारों को केवल सामग्री इकट्ठा करने के बजाय उसे सही तरीके से समझने और उत्तर लेखन में इस्तेमाल करने पर ध्यान देना जरूरी है।

UPSC Prelims का भाषा-वार डेटा क्यों नहीं मिलता?

राज्यसभा में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि UPSC की प्रारंभिक परीक्षा का भाषा-वार डेटा उपलब्ध नहीं कराया जाता।

इसका कारण यह है कि Prelims को माध्यम-निरपेक्ष परीक्षा माना जाता है। परीक्षा के प्रश्नपत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिए जाते हैं और उम्मीदवारों को उत्तर OMR शीट पर दर्ज करने होते हैं।

इस वजह से सरकार के पास प्रारंभिक परीक्षा में उम्मीदवारों के प्रदर्शन को अलग-अलग भाषा के आधार पर विभाजित करने वाला आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इसलिए हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के प्रदर्शन को समझने के लिए मुख्य परीक्षा और अंतिम चयन से जुड़े उपलब्ध आंकड़े ज्यादा उपयोगी नजर आते हैं।

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बिहार से UPSC में कितने उम्मीदवार चुने गए?

सरकार के जवाब में बिहार से संबंधित आंकड़े भी सामने आए हैं। बिहार उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में छात्र हिंदी माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक 2021 में बिहार से 54 उम्मीदवार UPSC Civil Services Examination के लिए अनुशंसित हुए थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 63 हो गई।

2023 में बिहार का प्रदर्शन और बेहतर रहा और कुल 82 उम्मीदवार अनुशंसित किए गए। यह 2021 से 2024 के बीच राज्य का सबसे अच्छा आंकड़ा रहा।

हालांकि 2024 में संख्या थोड़ी कम हुई और बिहार से 72 उम्मीदवारों की अनुशंसा की गई।

इससे यह समझ आता है कि किसी राज्य से आने वाले उम्मीदवारों की सफलता और हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की सफलता को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या हिंदी माध्यम से UPSC पास करना मुश्किल है?

यह कहना सही नहीं होगा कि हिंदी माध्यम से UPSC पास करना संभव नहीं है। UPSC में उम्मीदवारों के लिए भारतीय भाषाओं में उत्तर लिखने का विकल्प मौजूद है और हर साल अलग-अलग भारतीय भाषाओं के माध्यम से उम्मीदवार सफलता हासिल करते हैं।

असल चुनौती यह है कि उम्मीदवार अपने चुने हुए माध्यम में विषय को कितनी गहराई से समझता है और उसे परीक्षा की जरूरत के अनुसार कितनी स्पष्टता से प्रस्तुत कर पाता है।

हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को विशेष रूप से उत्तर लेखन पर ध्यान देना चाहिए। केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। सीमित शब्दों में तथ्य, विश्लेषण, उदाहरण और निष्कर्ष को व्यवस्थित तरीके से लिखना भी जरूरी है।

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हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी करने वालों को क्या करना चाहिए?

अगर कोई उम्मीदवार हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी कर रहा है तो उसे सबसे पहले अपने माध्यम को लेकर हीन भावना छोड़नी चाहिए। परीक्षा में सफलता केवल अंग्रेजी जानने पर निर्भर नहीं करती।

तैयारी के दौरान NCERT और मानक पुस्तकों की मजबूत समझ बनाएं। इसके बाद करेंट अफेयर्स को नियमित रूप से पढ़ें और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने शब्दों में नोट्स तैयार करें।

मुख्य परीक्षा के लिए नियमित Answer Writing Practice करें। पुराने वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें और यह समझने की कोशिश करें कि UPSC किस तरह के उत्तर की अपेक्षा करता है।

साथ ही हिंदी भाषा में लिखते समय बहुत कठिन और जटिल शब्दों के बजाय साफ, सरल और प्रभावी भाषा का इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

निष्कर्ष

UPSC में हिंदी और मैथिली माध्यम से सफल उम्मीदवारों के आंकड़े पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते रहे हैं। 2022 में जहां ऐसे 27 उम्मीदवार IAS-IPS पदों के लिए अनुशंसित हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 5 रह गई। दूसरी तरफ आठवीं अनुसूची की भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या 2024 में काफी बढ़ी, लेकिन सफलता का आंकड़ा उसी अनुपात में नहीं बढ़ सका।

इन आंकड़ों को हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए निराशा के रूप में देखने के बजाय एक संकेत के तौर पर समझना चाहिए। बेहतर अध्ययन सामग्री, मजबूत करेंट अफेयर्स तैयारी, लगातार उत्तर लेखन और सही रणनीति के साथ भारतीय भाषाओं के माध्यम से भी UPSC में सफलता हासिल की जा सकती है।

FAQs

क्या हिंदी माध्यम से UPSC की परीक्षा दी जा सकती है?

हां, UPSC Civil Services Examination में उम्मीदवार निर्धारित भारतीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा लिख सकते हैं। हिंदी भी उपलब्ध माध्यमों में शामिल है।

2024 में हिंदी-मैथिली माध्यम से कितने उम्मीदवार IAS-IPS के लिए अनुशंसित हुए?

सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2024 में हिंदी या मैथिली माध्यम से मुख्य परीक्षा लिखने वाले 5 उम्मीदवार IAS-IPS पदों के लिए अनुशंसित हुए थे।

2022 में हिंदी-मैथिली माध्यम का आंकड़ा कितना था?

2022 में हिंदी और मैथिली माध्यम से मुख्य परीक्षा लिखने वाले 27 उम्मीदवार IAS-IPS पदों के लिए अनुशंसित हुए थे।

क्या UPSC Prelims का भाषा-वार डेटा जारी होता है?

सरकार के अनुसार UPSC Prelims का भाषा-वार डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा को माध्यम-निरपेक्ष माना जाता है और प्रश्नपत्र हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों में होता है।

बिहार से 2024 में कितने उम्मीदवार UPSC के लिए अनुशंसित हुए?

2024 में बिहार से 72 उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के लिए अनुशंसित हुए थे। 2023 में यह संख्या 82 थी।